निमंत्रण (@१८/१/२०१७, बैंगलोर)

आओ, कि जीवन में तुम्हारा स्वागत है,
पर आओ तो जाने के लिए मत आना!
आओ, कि मुझे तुम्हारी भावनाओं की कद्र है,
पर सिर्फ एहसान जताने के लिए मत आना!

तुम्हारे आने की ख़ुशी इतनी है
कि मैंने पलकों पर तमन्नाओं की रंगोली सजा रखी है,
दिल में उम्मीदों की शम्में जला रखी है,
आओ, पर शम्में बुझाने के लिए मत आना।

लोग अक्सर आने का वादा कर के बंध जाते हैं,
तुम सिर्फ वादा निभाने के लिए मत आना।
आओ, कि जीवन में तुम्हारा स्वागत है,
पर आओ तो जाने के लिए मत आना!

- ©असीम शेखर